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रंगत के होटल हवाबील नेस्ट ने काफी दिमाग खराब कर दिया था । ना तो लोकेशन बढिया थी और ना ही खाना । होटल के आस ...



रंगत के होटल हवाबील नेस्ट ने काफी दिमाग खराब कर दिया था ना तो लोकेशन बढिया थी और ना ही खाना होटल के आस पास कोई आटोतक मिलने की गुंजाइश नही थी लोकल बस में घूम नही सकते थे इसलिये पहले आटो करने के लिये रंगत आये 15 किलोमीटर दूर फिर उसी रास्ते पर घूमकर रंगत वापिस गये और अब रंगत से बस पकडनी है जो फिर से 15 किलोमीटर उसी रास्ते पर होकर जायेगी यानि इसी सडक पर कल से पांचवा चक्कर है

 

पर रंगत की देखने वाली जगहो ने निराश नही किया चाहे वो आमकुंज बीच हो या फिर पंचवटी और संगम आदि सभी जगहे बढिया थी हम रंगत वापिस गये थे और बस अडडे पर उतर गये आटो वाले को पैसे देकर विदा किया और कुछ खाने को देखने लगे तभी बस स्टैंड के सामने एक दुकान पर नारियल देखे हमने सुबह से कुछ नही खाया था सो नारियल पानी का नाश्ता कर लिया बस स्टैंड पर गये तो पता चला कि साढे नौ बजे एक लोकल बस है मायाबंदर के लिये और साढे ग्यारह बजे एक्सप्रेस जो कि पोर्ट ब्लेयर से सुबह साढे चार बजे चली होगी वो आयेगी हम सुबह साढे चार बजे उठकर रंगत के लिये चले थे और साढे पांच बजे से घूमना भी शुरू कर दिया था इसलिये आठ बजे तक सारी जगह घूम आये थे


अभी तो साढे आठ ही बजे थे और लोकल बस केवल मायाबंदर तक जाने वाली थी । उसके बाद वहां से कनेक्टिंग बस मिल जाती डिगलीपुर के लिये । दूसरे तरीके में साढे ग्यारह बजे तक इंतजार करना पडता । लोकल बस में सी​ट मिलने के चांस थे पर एक्सप्रेस में हो सकता था कि ना मिले क्योंकि वो तो पोर्ट ब्लेयर से आ रही है इसलिये हमने लोकल बस में ही चलना तय किया ।

एक घंटे का समय बिताने के लिये बस स्टैंड की कैंटीन में घुस गये और यहां पर मिल रहे पूरी और बडे का नाश्ता लेकर उस पर पिल पडे । 75 रूपये में सारा काम हो गया । पेट पूजा हो गयी तो बस की इंतजार करने लगे । तभी किसी ने बताया कि लोकल बस रंगत के मेन चौराहे से होकर चलती है और यहां पर बाद में आती है हो सकता है यहां पर आपको सीट ना मिले पर वहां से मिल जायेगी ।


सिर पीट लिया । ये इतना बडा स्टैंड बनाया है किस लिये खडे खडे यात्रा करवाने के लिये । बस स्टैंड से मेन चौक तीन सौ मीटर के आसपास होगा । अपने अपने बैग् उठाये और चल पडे । वहां पहुंचे तो बस भर चुकी थी और एक सीट ही मिल पायी । उस पर हमने बुजुर्ग साथी राजेश जी को बिठा दिया और हम ड्राइवर के पास बोनट पर बैठ गये । उन्होने कहा कि लोकल बस है आज संडे का दिन है आगे जाकर चर्च के पास काफी सीट खाली हो जायेंगी ।


लोकल बस का एक फायदा ये था कि हम आराम से कहीं कहीं फोटो भी ले सकते थे । रास्ते में एक जगह पडती है जो कि रंगत जैसा ही बडा कस्बा है बिल्ली ग्राउंड । शायद इसके नाम पर ही लोग यहां बिल्लियां ज्यादा पालते हैं ।



billyground town
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बिल्लीग्राउंड कस्बा
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rangat to mayabundar ,रंगत से मायाबंदर , natural beauty, pictures
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beautiful hut
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lush green fields
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durgapur
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mayabunder , andaman
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ये जमाई राजा ने यहां भी कब्जा कर लिया
mayabunder , andaman
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an island view from mayabunder , andaman
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मायाबंदर नाम की ये जगह जो कि काफी बडा कस्बा है वैसे तो हमारे रास्ते में नही था अगर हम एक्सप्रेस गाडी से आ रहे होते । रंगत से 74 किलोमीटर दूर ये जगह एक बंदरगाह भी है और यहां की जेटटी भी कुछ जगह के लिये फेरी चलती हैं जिनमें कुछ द्धीप देखने लायक हैं पर वे 20 दिन के टूर वालो के लिये ज्यादा हैं ।


साढे ग्यारह बजे हम मायाबंदर पहुंच गये । यहां मायाबंदर से करीब 7 किलोमीटर पहले एक जगह पडती है पानी घाट । ये एक तिराहा है जहां से एक्सप्रेस गाडियां मायाबंदर को बाईपास करके चली जाती हैं । 



पहले तो हमने सोचा कि यहीं पर उतर जाते हैं पर फिर से वही परेशानी थी कि अगर एक्सप्रेस गाडी में सीट ना मिली तो ? हमें कंडक्टर ने बताया ​कि मायाबंदर से डेढ बजे गाडी मिलेगी लोकल वाली डिगलीपुर के लिये । ज्यादा समय का अंतर नही था इसलिये हमने मायाबंदर में ही उतरने की सोची । जब हम मायाबंदर में उतरे तो काफी गर्मी थी । बस स्टाप के पास एक शेड बना था जिसमें हम बैठ गये । एक पानी की 2 लीटर की बोतल खाली कर दी । 


मैने और जाट देवता ने मायाबंदर के इस शेड से नीचे की ओर देखा तो समंदर हिलोरे ले रहा था । मायाबंदर एक उंची सी जगह पर है । इसके तीन ओर तो समंदर ही है । हमने इस समय का फायदा उठाया और नीचे की ओर बीच पर चल पडे । ना हमने किसी से ये पूछा कि बीच का नाम क्या है या मंदिर का नाम क्या है और बीच और मंदिर दोनो घूम डाले ।


मंदिर तो बिलकुल सुनसान था और उसमें तो पुजारी तक भी नही थे । वैसे ये अपनी शैली हिसाब से तो दक्षिण भारतीय मंदिर ही लग रहा था । मंदिर के तीन ओर समुद्र था । एक ओर तो बढिया बीच भी था । बीच पर कोई नही था सिवाय खाली नावो के । ये जगह अंडमान के नक्शे में पर्यटक स्थल के रूप में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध नही है । मंदिर को घूमने के बाद हमने मंदिर के पीछे जाकर कुछ फोटो खींचने की सोची । मंदिर समुद्र से कुछ उंचाई पर है इसलिये हम मंदिर के पीछे के ढालान से उतर गये । उतरते समय हमें दो आम मिले पके हुए जिन्हे हमने रख लिया हालांकि हमने उन्हे खाया नही बल्कि कई दिनो तक बैग में रखे घूमते रहे । मंदिर के पीछे एक दीवार भी बनी हुई थी जिस पर को हम घूमते हुए वापस मंदिर के गेट तक आ गये । 


बीच पर बच्चे क्रिेकेट खेल रहे थे । मंदिर की दूसरी साइड से मायाबंदर की जेटटी साफ दिख रही थी । मैने यहां के कर्मातांग बीच और एक पार्क के बारे में पढा था और मै उसे घूम भी लेता पर हमारे पास इतना समय ही नही था । वैसे ना मुझे पता चला और ना मैने किसी से पूछा कि इस बीच का क्या नाम है । वापसी में जब चढने लगे तो वहीं पर एक तालाब बना हुआ था जिसमें कमल के फूल थे । अभी खिले तो नही थे बस कलियां थी । इनके फोटो लेकर वापस बस स्टैंड पर आ गये । डेढ बजे का टाइम होने वाला था और अभी तक बस नही आयी थी । हम परेशान होने लगे थे क्योंकि दो तीन दिन में ही यहां की समय की पाबंदी ने हमें आदी बना दिया था ।


मै तो संदीप भाई और राजेश जी को कह रहा था  कि हम आटो करके पानीघाट तक चलते हैं किसी कारण से अगर बस नही आयी तो हमें एक्सप्रेस बस तो मिल जायेगी वहां से । एक आटो वाले से पूछा तो उसने 200 रूपये मांगे । हम सौ तक देने को तैयार थे पर इतने में वो तैयार नही था । एक बजकर चालीस मिनट पर बस आ गयी । पहली बार दस मिनट की देरी हुई थी और हम तो अधीर हो चले थे ।


mayabunder view
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tamil temple in mayabunder , andaman
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mayabunder beach , andaman
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यहां देखो दोनो कैसे एक साथ लहरा रहे हैं
mayabunder town , andaman
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mayabunder jetty , andaman
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lotus pond in mayabunder
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इसी बस के पीछे आनंदा नाम की एक्सप्रेस बस भी आ गयी । इस बस का टिकट 85 रूपये तो उसका 185 रूपये था डिगलीपुर तक जाने का । उस बस में सीट भी नही दिख रही थी इसलिये हमने ज्यादा ध्यान भी नही दिया । ये बस सारी खाली थी और कुछ सवारी इसमें आगे रास्ते में से चढी जो कि लोकल थी और थोडी दूर पर जाकर ही उतर गयी । इसके बाद रास्ते में ज्यादा सवारी भी नही मिली और ड्राइवर ने भी खूब दबाकर भगायी गाडी ।


डिगलीपुर तक इसने कुल डेढ घंटे में ही पहुंचा दिया । वैसे ट्रैफिक के नाम पर भी कुछ खास नही मिला । लगभग 3 बजे हम डिगलीपुर में उतर गये । यहां पर बस स्टैंड होगा भी तो पता नही पर सब गाडियां यहां के एक चौक पर ही खडी हो गयी थी और हमारी बस ने भी हमें यहीं पर उतारा था । उतरने के बाद हमने यहां के एक दो लोकल बंदो से पूछा अपने होटल के बारे में तो उन्होने बताया कि ये होटल तो कालीपुर में है । और कालीपुर कितनी दूर है तो उन्होने बताया कि कालीपुर तो यहां से करीब 20 किलोमीटर दूर है और वहां के लिये बस या आटो से जाना होगा ।


ये अंडमान वाले इसी तरह क्यों करते हैं ? रंगत का होटल 15 किलोमीटर रंगत से तो डिगलीपुर का होटल कालीपुर में । खैर हमने बस के बारे में पूछताछ की तो एक दो लोगो ने बताया कि बस तो आज काफी देर से आयी नही है और शायद आये भी नही । क्यों भाई ? कोई खास कारण पता नही चल पाया तो हम आगे चलते रहे । एक मैजिक खडा था । हमने उससे पूछा कि कालीपुर चलोगे तो उसने कहा कि पूरा बुक करोगी कि शेयर में ? हमने कहा कि शेयर में चलेंगें तो उसने कहा कि रूक जाओ मै स्टैंड से दो तीन सवारी ले आता हूं और आपको 50 रूपये प्रति सवारी देने पडेंगें । हमने हामी भर ली और अपना सामान आटो के पीछे रख लिया । वो जल्दी ही एरियल बे जो कि रास्ते में पडता है और एक सवारी आर्मी वाले को ले आया और हम बैठकर कालीपुर की तरफ को चल दिये ।


कालीपुर का रास्ता भी बडा सुंदर था । डिगलीपुर से कालीपुर के रास्ते में दो चीज बडी अच्छी आयी । एक तो एरियल बे नाम की जेटटी और एक रोज और स्मिथ आईलैड । दोनो चीजे रास्ते में चलते चलते ही देखी पर बढिया लगी । एरियल बे नाम की जेटटी का गांव भी है । एरियल बे जेटटी जो कि सुदूर अंडमान के कोने की जेटटी है इससे एक बोट चलती है पोर्ट ब्लेयर के लिये रात को आठ या नौ बजे जो कि सुबह आठ बजे पहुंचा देती है पोर्ट ब्लेयर में । ये ऐसा है जैसे हम वैष्णो देवी जाने के लिये रात को ट्रेन में बैठते हैं और सुबह पहुंच जाते हैं कटरा । सोते सेाते गये और पता ही नही चला कि कब 600 किलोमीटर कट गये ।


मेरी इस बोट में जाने की इच्छा भी थी और नही भी । इच्छा तो इसलिये थी क्योंकि ये एक रोमांचक सफर होने वाला था जो कि 300 किलोमीटर का समुद्र का सफर था और नही इसलिये थी क्योंकि ये पूरा सफर रात का था और एक तो रात को हम देखते क्या दूसरी बात ये कि बारिश और मौसम खराब में रात का सफर दिक्कत भी कर सकता है तो मै इस पर संशय में था पर इतना जरूर था कि अगर किसी वजह से रंगत से हैवलाक के लिये जेटटी नही मिली और यहां से मिली तो जरूर पकड लूंगा

दूसरी सुंदर जगह जो एक ही नजर में मोहित कर देने वाली थी वो थी रोज और स्मिथ आइसलैंड की एक झलक । पहली ही नजर में मोहित कर देने वाली इस झलकी की खास बात थी दूर से दोनो आइसलैंड की सफेद रेत की चमक । दूर दूर तक सफेद रेत के बीच यानि व्हाइट सैंड चमक रहे थे तो जाने के लिये दिल अपने आप ही मचल उठा । यहां पर जाने के लिये एरियल बे से बोट मिलती है स्पीड बोट जो कि ढाई हजार रूपये लेती है और करीब 6 से 8 लोगो को ले जाती है । ये पर्यटक सीजन में आसान है क्येांक आपको एक आदमी के 400 रूपये ही देने होते हैं पर आफ सीजन में पर्यटक नही हैं तो आपको ही पूरी बोट बुक करके ले जानी पड सकती है । ये बात हमें होटल में जाकर पता चल गयी थी कि इस वक्त पर्यटक नही हैं और आप पूरी बोट बुक करके ही जा सकते हैं ।



फक्कड घुमक्कड आदमी के पास इतने पैसे कहां कि आठ सौ रूपये एक पन्द्रह मिनट की सवारी पर ही खर्च कर दे तो हमने सोचा कि इसके बारे में बाद में फैसला लेते हैं ।


lotus pond in mayabunder
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diglipur town , andaman
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